अलसी या तीसी का पौष्टिक महत्व खेती और व्यापार।

परिचय:- विश्व भर में भारत का तिलहन उत्पादन में एक महत्वपूर्ण योगदान है। तिलहन क्षेत्र, उत्पादन और मूल्य के मामले में अनाज़ के बाद ही आते हैं। तिलहन में अलसी का एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसे अंग्रेजी में लिनसीड यानी अति उपयोगी बीज भी कहा जाता है। यह विश्व की छठी सबसे बड़ी तिलहन फसल है। […]

तिलहन की खेती, परिचय और व्यापार।

तिलहन उन फसलों को कहते हैं जिनसे वनस्पति तेल का उत्पादन होता है। जिसमें महत्वपूर्ण हैं तिल, सरसो, मूँगफली, सोया, सूरजमुखी, नारियल और कुसम। तिलहन फसलों को कम पानी की आवस्यकता होती है। इसकी खेती अनुपजाऊ भूमि तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाती है। क्षेत्रफल की दृष्टि से खाद्यान्न फसलों के बाद तिलहन […]

कटहल के उत्पाद तथा उनका व्यापार में महत्व।

परिचय:- यह एक सघन शाखायुक्त तथा बहुवर्षीय वृक्ष है। पेड़ पे होने वाले फलों में कटहल का फल विश्व में सबसे बड़ा होता है। यह 55 किलोग्राम तक का होता है। इसकी लंबाई 80 सेमी तथा  ब्यास 50 सेमी तक होता है। इसकी उत्पत्ती दक्षिणभारत  पश्चिमी घाट तथा मलेशिया के वर्षावन से हुई है। कटहल […]

कच्चे आमों के उत्पाद तथा उनका व्यापार में महत्व।

आम भारत का एक महत्ववपूर्ण फल है। इसके बाग दक्षिण में कन्याकुमारी से उत्तर में हिमालय की तराई तक है। पश्चिम में पंजाब से पूर्व में आसाम तक, अधिकता से होता है। अनुकूल जलवायु मिलने पर इसका वृक्ष 50-60 फुट की ऊँचाई तक पहुँच जाता है। इसके पेड़ से ले कर फल तक इस्तेमाल करने योग्य होता […]

भारतीय फलों का राजा आम तथा,बाजारों का प्रभाव।

आम भारत के फलों का राजा है। यह, दीर्घजीवी, सघन तथा विशाल वृक्ष होता है। जो भारत के दक्षिण में कन्याकुमारी से उत्तर में हिमालय की तराई तक । पश्चिम में पंजाब से पूर्व में आसाम तक, अधिकता से होता है। अनुकूल जलवायु मिलने पर इसका वृक्ष 50-60 फुट की ऊँचाई तक पहुँच जाता है। यह […]

भारत में बाजारों पर कोरोना के प्रभाव तथा मौसमी फल और सब्जियाँ।

कोरोना:- यह एक वैश्विक त्रासदी है। प्लेग के पश्चात ऐसी त्रासदी पहली बार आई है। जिससे पूरा विश्व ग्रस्त है। ना तो इसके विषय में अधिक जानकारी है न ही कोई दवा की उपलब्धता। बस हमें एक बात की जानकारी है सोशल डिस्टेंसिंग जिससे कोरोना से बचा जा सकता है। सोशल डिस्टेंसिंग :- इसका तात्पर्य […]

भारत में लीची की खेती का विकास

इतिहास, माना जाता है कि लीची सबसे पहले चीन में 1059 में जंगली पौधे से बागों तक पहुंची। चीन में लीची को प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। करीब 700 साल तक बाकी दुनिया में लीची को लेकर कोई जानकारी नहीं थी। 18वीं सदी की शुरुआत में फ्रांसीसी यात्री पियरे सोन्नरे ने दक्षिणी चीन की अपनी यात्रा […]

अपना ब्राण्ड खुद बनें

ब्राण्ड क्या होता है ? और अपना ब्राण्ड खुद कैसे बना जा सकता है? साधारण शब्दों में कहा जाए तो ब्राण्ड का अर्थ है। उपभोक्ताओं के मध्य किसी नाम की प्रतिष्ठा। जिसके फलस्वरूप उपभोक्ताओं को ब्राण्ड के नाम से ही वस्तु की गुणवत्ता पे विश्वास हो जाता है। दूसरा सवाल है की ब्राण्ड बना कैसे […]

बाज़ार की समस्या

बाज़ार की समस्या से तात्पर्य क्या है? बाज़ार की समस्या से तात्पर्य है, कुछ नए प्रकार के उत्पाद जिसमें फ़ायदे अधिक हैं। लेकिन उनके परिवेश में उस उत्पाद के उपभोक्ता कम हैं। इस कारण यदी वो नए फसल की खेती करते हैं तो उन्हें बाज़ार नहीं मिल पाता। जिसके फलस्वरूप वो पारंपरिक खेती करने के […]

भंडारण की समस्या से निज़ात।

किसानों द्वारा अनाज के भण्डारण में जो समस्याएं गहराती जा रही है। इससे बचने के क्या-क्या उपाय हो सकते हैं? 1)- अनाजों के लिए निजी भंडार बनवाना। 2)- अनाजों को सार्वजनिक भंडार गृह में जमा करवाना। 3)- अनाज को उपभोक्ताओं तक पहुँचा देना। 1)- अनाजों के लिए खुद का भंडार बनवाना:-  निजी भंडार बनवाना छोटे और […]

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